Thursday, August 18, 2016

चाय में चीनी सी ज़िन्दगी में घुली तुम्हारी नज्में...!



सुनो... एक कप चाय पियोगे हमारे साथ.. दो पल साथ बैठो ना... कि बड़े अर्से बाद आज थोड़ी फ़ुर्सत हाथ लगी है वो भी रात के इस पहर... और आज तुम्हारा जन्मदिन भी है तो तुमसे यूँ ही थोड़ी बातें करने का दिल चाह रहा है.. पिछले साल तो तुम्हारे जन्मदिन पर कुछ लिख भी नहीं पायी तुम्हारे लिये... हाँ याद सारे दिन किया... सुनने में कितना अजीब सा लगता है ना.. कि लेखक ठहरे तुम और हम जैसे कोई बड़े फन्ने खां हैं जो तुम्हारे बारे में लिखेंगे... फिर भी जाने क्यूँ लोग तुम्हें ढूँढते हुए हमारे दरवाज़े आ जाते हैं... सही कहते हैं लोग इश्क और मुश्क छुपाये नहीं छिपते... तुमसे हमारा इश्क भी मशहूर हो चला है...

मोटर गैराज में रंगों के शेड्स मिलाते मिलाते जाने कब तुम ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से यूँ खेलने लगे... उनकी बारीकियों को ऐसे जान लिया... तुमने लिखना तो बहुत देर से शुरू किया पर शायद ज़िन्दगी के तजुर्बों को बचपन से ही आत्मसात करते गए थे... वो सब तजुर्बे जो तुमने अपने दिल में संजो रखे थे वो सब तुम्हारी नज़्मों में घुले हुए नज़र आते... तुम्हारी नज़्मों से गुज़रो तो समझ आता है कि वो ज़िन्दगी के इतने करीब कैसे हैं... बिना उन लम्हों को जिये कोई यूँ ही नहीं लिख सकता इस साफ़गोई से और दिल को यूँ छू लेने वाला और कभी कभी झकझोर देने वाला... सोचने पे मजबूर कर देने वाला... कुछ मायनों में तुम्हारी नज़्में हम सब का एक्सटेंशन हैं... हमारे लम्हों और हमारी ज़िन्दगी का एक्सटेंशन...

तुम्हारी नज़्में ज़िंदगी के हर लम्हें में घुल गयी हैं... कोई ना कोई नज़्म हर मोड़ पर हाथ थामे मिल ही जाती है... ख़ुशियों में... उदासियों में... प्यार में... तकरार में... सुनहरी सुबहों में... संदली शामों में... बारिशों के पानी में बच्चों सी छप-छप करती कोई, निम्मी निम्मी ठण्ड में आंगन में धूप सेकती कोई... चाँदनी रातों में बादलों का पश्मीना ओढ़े कोई... और तुम्हारी इन नज्मों से सिर्फ़ हम ही मुतास्सिर नहीं हैं.. यकीन नहीं तो ख़ुद देख लो.. जितने अच्छे से तुमने ये समझाया है कि नज़्म क्या होती है उतनी ही ख़ूबसूरती से ये विडियो बनाया गया है... जिसे चार मराठी डायरेक्टर्स ने अपनी फिल्म बाईस्कोप की ओपनिंग में इस्तेमाल किया था, ये फिल्म भी चार शायरों की नज्मों पर बनायी चार शॉर्ट फिल्मों के फॉर्मेट में एक अनूठा प्रयोग थी... तुमसे मुत्तासिर लोग भी तुम जैसे ही हो जाते हैं... अनकन्वेंशनल और सेंसिटिव !!!

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आज का दिन तुम्हें और तुम्हारे चाहने वालों को बहुत बहुत मुबारक़ हो.. हैप्पी बर्थडे गुलज़ार साब... आज तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हारे चाहने वालों के लिए तुम्हारी पचास कहानियाँ छोड़े जाती हूँ...


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दिल की गिरह खोल दो... चुप ना बैठो...

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