Wednesday, August 11, 2010

वक़्त की कतरने...


ये जो रंग बिरंगी कतरने हैं ना
तुम्हारे साथ बिताये वक़्त की
जी चाहता है इन कतरनों को जोड़
एक मुकम्मल उम्र सी लूँ
एक ख़ूबसूरत ज़िन्दगी बना लूँ

एक लम्बा सा दिन सियूँ
तुम्हारे साथ का
और एक लम्बी सी रात
हाँ कुछ सुस्त से लम्हों को चुन
एक फ़ुर्सत भरी दोपहर भी

वो कुछ पल कि जिनमे तुम
सिर्फ़ मेरे पास होते हो
दिल और दिमाग से
उन चमकीले पलों को जोड़
एक शबनमी शाम भी सी लूँ

सोचो गर ऐसा कर पाऊँ
ये ज़िन्दगी कितनी ख़ूबसूरत हो जाये
हर एक पल में तुम्हारा साथ पा के
और मैं इस ख़ूबसूरत उम्र को पहन
इतराती फिरूँ इस दुनियाँ में...

-- ऋचा

12 comments:

  1. bahut khoob..

    jitni khoobsoorat aapki rachna hai, utni hi khoobsoorat aapne pic bhi lagayee hai...

    Happy Blogging

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  2. Sach! Aisa ham kar payen to zindagi kitnee haseen ho jaye!
    Tasveer wala patchwork to lag raha hai jaise meri chaddar parse utha liya ho!

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  3. excellent ..... saath ke palon ki silaai , isse khoobsurat paridhan aur kya !

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  4. इन्ही कतरनों से पूरा जीवन तैयार हो जाता है।

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  5. वक्‍त है कि कतरा कतरा ही मिलता है। सिलना तो उसे हमें पड़ता ही है।

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  6. उन चमकीले पलों को जोड़
    एक शबनमी शाम भी सी लूँ....
    bahut hi khoob...

    Meri Nayi Kavita par aapke Comments ka intzar rahega.....

    A Silent Silence : Zindgi Se Mat Jhagad..

    Banned Area News : Amritsar police seize fake currency worth Rupees 9,00,000

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  7. आपकी रचना बहुत प्यारी है ....वो गुलजार के शब्द याद आ गये ....
    कतरा कतरा मिलती है
    कतरा कतरा जीने दो
    जिंदगी है, बहने दो ....

    इजाज़त मेरी पसंदीदा फिल्म है :)

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  8. के एक साहब है .जो अक्सर हमारे दिल के जाने कौन कौन से कोनो के बल्ब सरे बाजार जला जाते है .....आपकी भी अच्छी वाकीफियत है उनसे .उन्हें कही कहा था ..

    बड़ी हसरत है पूरा एक दिन, इक बार मैं
    अपने लिये रख लूं

    तुम्हारे साथ पूरा एक दिन, बस खर्च करने कि तमन्ना है!!

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  9. First of All ye Skirt chahiye....katran waali hi sahi...khoobsoorat to hai.

    Now second....Ye sab kahan, kab, kaise hua hamko to pata hi nahi chala :-)

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  10. गुलज़ार साहेब की याद आ गयी...
    और आपकी मासूम ख्वाहिश के तो क्या कहने.. कभी दिन कस्ट्माईज और अब ज़िन्दगी की सिलाई/बुनाई अपने ढंग से.. सुन्दर..

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  11. इन्हीं कतरनों को बहुत सँजोकर रखना पड़ता है.

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  12. bahut khoob ji ,

    kavit apadhte hue aankhe kahin nam hui.. dil ki baato ko aapne kitne acche se shabdo me utaara hai ..

    BADHAI

    VIJAY
    आपसे निवेदन है की आप मेरी नयी कविता " मोरे सजनवा" जरुर पढ़े और अपनी अमूल्य राय देवे...
    http://poemsofvijay.blogspot.com/2010/08/blog-post_21.html

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दिल की गिरह खोल दो... चुप ना बैठो...

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