Lamhon Ke Jharokhe Se...

कुछ लम्हे कभी ख़त्म नहीं होते... हमारी यादों में ठहर जाते हैं, "फ्रीज़" हो जाते हैं... यादों की झोली से निकाले हुए ऐसे ही कुछ ठहरे हुए लम्हे...

Friday, June 2, 2017

केरल डायरीज़ - ५ : पानियों पे बहती ज़िन्दगी...

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१ फरवरी २०१७ मुन्नार की ख़ुमारी अभी उतरी भी नहीं थी कि आज एक और सफ़र पर निकलना था... आज का दिन थोड़ा लंबा होने वाला था... कोच्ची ...
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Monday, May 15, 2017

केरल डायरीज़ - ४ : साहिर सुबह पहाड़ों की...

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३१ जनवरी २०१७ आपने पहाड़ों की सुबह देखी है कभी ? पहाड़ों से ज़्यादा आलौकिक सुबह शायद ही कहीं होती हो धरती पर... जब रात की सियाही को भे...
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Thursday, April 27, 2017

केरल डायरीज़ - ३ : मसालों की मादक गंध और चाय की चुस्कियों में डूबा वो शहर

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वालर वॉटरफॉल कोच्ची से क़रीब तीन घंटे के सफ़र के बाद पहाड़ी रास्ता शुरू होता है... जैसे जैसे हम ऊपर चढ़ते जाते हैं मौसम लुभावना होता जाता...
Thursday, April 20, 2017

केरल डायरीज़ - ३ : प्रकृति की गोद में परीकथा से घर... कोच्चि से मुन्नार

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३० जनवरी २०१७   कहने को केरल में आये दो दिन हो चुके थे... अब तक हम कोच्ची से भी मिल चुके थे और अथिरापल्ली के भीमकाय झरनों से भ...
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Thursday, April 6, 2017

केरल डायरीज़ - २ : मिलना जल पर्वत से !

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२९ जनवरी २०१७ बाहुबली फ़िल्म देखी है आपने ? अगर हाँ तो वो जल पर्वत तो याद ही होगा आपको... वो विशालकाय ख़ूबसूरत सा झरना जिस पर बाहुबली ...
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richa
अपने बारे में क्या बताऊँ आपको, नवाबों के शहर लखनऊ में पली बढ़ी एक आम लड़की हूँ, a software engineer by profession... लेखिका नहीं हूँ सो शब्दों से खेलना नहीं आता, पर सराहना ज़रूर आता है और ज़िन्दगी की छोटी छोटी चीज़ों में खुशियाँ तलाशना आता है... बच्चों की मासूम किलकारी, फूलों की ख़ुश्बू, प्रकृति की शान्ति, रंग बिरंगी तितलियाँ, हवा में उड़ते गुब्बारे, बारिश की बूँदें, मिट्टी की सौंधी सी महक... बरबस ही हमें अपनी ओर खींच लेते हैं... i believe, with all its complications and uncertainties, life is still beautiful and worth living... u just have to face it with a positive attitude and take everything in ur stride !!
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